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Rajni Kant Dubey

सरकारें या पुलिस दोनों में दोषी कौन ?

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##सरकारें या पुलिस दोनों में दोषी कौन ?##
जब पुलिस को किसी भी अपराध की सूचना किसी भी व्यक्ति से लिखित या मौखिक या किसी भी माध्यम से मिलती हैं,तो पुलिस का दायित्व हैं कि वह सर्वप्रथम प्राप्त अपराध के सूचना 154 द•प्र•स•के तहद प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करें, फिर मामले की जांच करें। उसके बाद पुलिस मामले में अग्रिम कार्यवाही करें।लेकिन वास्तविकता में पुलिस ऐसा नहीं करतीं हैं। यहाँ तक की यदि कोई व्यक्ति पुलिस के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को डाक से रिपोर्ट दर्ज करने की देने पर भी पीड़ित की रिपोर्ट नहीं लिखतीं हैं और जब पीड़ित व्यक्ति 156(3) द्र•प्र•स•के अधीन माननीय न्यायालय में प्रार्थना प्रत्र प्रस्तुत करता हैं तो माननीय न्यायालय पुलिस से आख्या मांगती हैं जिसका अभिप्राय केवल इतना होता हैं कि पुलिस यह बताये की मामले की रिपोर्ट दर्ज हैं या नहीं। पुलिस फिर ज्यादातर मामले की पूरी जांच कर माननीय न्यायालय को प्रेषित कर देतीं हैं।जब कि पुलिस को कानून की किसी भी धारा में यह अधिकार प्राप्त नहीं हैं। कि वह बिना रिपोर्ट लिखे किसी मामले की जांच करें।जब कि पुलिस के दोनों कार्य अपराध की श्रेणी में आते हैं।यह मूल वजह हैं अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ने की।ऐसा पुलिस मात्र इसलिए करतीं हैं कि हर सरकारें चाहती हैं कि उसके कार्यकाल में अपराध का स्तर लिखा पड़ी में कम से कम हो।जिसकी वजह से आम जनता की पुलिस अपनी नौकरी बचाने के लिए गंभीर मामलों में भी रिपोर्ट नहीं लिखतीं हैं।क्यों कि पुलिस के ऊपर उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के अनुसार उच्चाधिकारी कार्यवाही कर सकते हैं।अब पुलिस अपनी नौकरी बचाये या फिर जनता की मदद करें।आप ही बताये दोषी सरकार ? या फिर पुलिस ?

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