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रजनी कान्त दुबे

राजनीतिज्ञ

-: संक्षिप्त परिचय :-

मेरा प्रचलित नाम रजनीकान्त दुबे तथा उपनाम विनय व अर्जुन पंडित हैं मै एक भारतीय राजनीतिज्ञ हूँ। मेरा जन्म 01 जुलाई 1972 में ग्राम व पोस्ट-भैरोपुर, थाना-मधुबन,जनपद-मऊ-उत्तर प्रदेश हुआ हैं।मेरा निवास-गीतापल्ली, आलमबाग, लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हैं।

मैं समाज सेवक पार्टी (एस.एस.पी.)का संस्थापक सदस्य तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष हूँ ,मेरे पिता का नाम-छबिनाथ दुबे और माता का नाम दुर्गावती देवी हैं,मेरी जाति पंडित और धर्म हिन्दू तथा राष्ट्रीयता भारतीय हैं,मेरी पत्नी का नाम कुसुम दुबे हैं, मेरी अपनी कोई कोई संतान नहीं है,मेरे तीन छोटे भाई और दो छोटी बहनें हैं,मैं विधि स्नातक हूँ,मेरा पेशा वकालत, समाज सेवा और राजनीति हैं।

जीवन परिचय:-

मेरा जन्म 01जुलाई 1972 को ग्राम व पोस्ट- भैरोपुर, थाना-मधुबन, जनपद- मऊ उत्तर प्रदेश में पिता छबिनाथ दुबे तथा माता दुर्गावती देवी के यहाँ हुआ, मेरे बाबा शिवमूरत दुबे जो एक किसान थें बाद में उन्होंने मेसर्स दुबे कांन्सट्रक्न कम्पनी फर्म को जनपद लखनऊ में स्थापित किया जो रेलवे विभाग के उत्तर रेलवे में ठेकेदारी का कार्य करतीं थी, मेरे पिता रेलवे विभाग के ब्रिजवर्क शाप चारबाग लखनऊ से कार्यालय अधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त रेलवे कर्मी है साथ हीं वह उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन के “केंद्रीय उपाध्यक्ष” रहें हैं।

अपने परिवार में अपने पिता के बाद केवल मैं ही एक ऐसा सदस्य रहा जो अपने पिता तथा बाबा के पदचिन्हों पर चल कर अपनी शिक्षा के साथ ही अपने पिता की राजनीति और अपने बाबा शिवमूरत दुबे और दादी गुजराती देवी के बाद उनकी मेसर्स दुबे कांन्सट्रक्शन कम्पनी की फर्म के रेलवे विभाग की ठेकेदारी के कार्यो की धरोहर को बखूबी से सम्हाला।

मुझे शुरू से ही गरीब, मजदूर व असहाय लोगों की सहायता करने में बड़ी खुशी मिलती हैं इसी बीच हत्या के मामले फंसे एक निर्दोष गरीब व्यक्ति की कानूनी सहायता करने के लिए मैं अपना रेलवे विभाग की ठेकेदारी का कार्य छोड़कर वकालत पेशे में आ गया और जनपद लखनऊ की न्यायालय में वकालत करने लगा मुझको दीवानी, फौजदारी तथा पारिवारिक मुकदमों का बहुत ही विशेष अनुभव हैं।

मै किसी का भी मुकदमा दूसरे का समझ कर नहीं करता कि यह मुकदमा किसी और का है बल्कि खुद को पीड़ित व्यक्ति समझ कर मुकदमा करता हूँ। केवल मेरा एक ही लक्ष्य रहता हैं कि अपने पास आये पीड़ित व्यक्ति को न्याय !अपनी इसी आदतों के चलते मैं अभी तक कोई मुकदमा नहीं हारा।

अपने वकालत के पेशे के साथ ही मैं राजनीति में भी सक्रिय रहा।मेरे हर समाजिक कार्य में मेरे पिता छविनाथ दुबे और मेरी पत्नी कुसुम दुबे का सहयोग मुझे बराबर मिलता रहाता है। मेरे पिता मेरे द्वारा किये जा रहें समाजिक कार्यो से अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं  23 वर्ष की वकालत के बाद मुझे समझ में आया कि वकालत से देश की आम जनता को न्याय नहीं मिल सकता हैं सारी समस्या की जड सत्ता हैं।

शिक्षा:-

मेरी प्रारम्भिक शिक्षा जनपद लखनऊ के सिटी मान्टेसरी,लखनऊ पब्लिक स्कूल,गाँधी विद्यालय हायर सेकेंडरी स्कूल,लाला रामकुमार इंटर कालेज जनपद बाराबंकी से हुयीं,मैंने वर्ष 1992 में बप्पा श्री नारायण डिग्री कालेज लखनऊ से राजनीति शास्त्र में (स्नातक ) की डिग्री तथा वर्ष 1996 में जयनारायण डिग्री कालेज लखनऊ से ( विधि स्नातक ) की डिग्री को प्राप्त किया।

विवाह:-

मेरा विवाह जनपद- बलिया-उत्तर प्रदेश की कुसुम दुबे से 20 फरवरी 1995 में हुआ कुसुम दुबे के पिता उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के सेवानिवृत्त कर्मी रहे। मेरी पत्नी कुसुम दुबे की रूचि भी मेरी तरह समाज की सेवा और गरीबों की सहायता में शुरू से ही रही जो कि एक समाज सेविका होने के साथ ही समाज में अपनी लोकप्रियता के चलते  “समाज सेवक पार्टी” की बर्तमान समय में उपाध्यक्ष हैं।

गरीबों ,शिक्षितों ,बेरोजगारों को रोटी,
कपड़ा मकान व रोजगार दिलाने आयी हूँ,
सभी को आर्थिक संपन्न व अपराध मुक्त बनाने आयी हूँ।
हाँ मैं आजाद हिन्दुस्तान लिखने आयी हूँ।

कुसुम दुबे

समाज सेविका

संतान:-

मेरी अपनी कोई संतान नहीं हैं एक कन्या आराधना पाण्डेय को मैं अपनी पुत्री मानता हूँ। जिसका विवाह मैंने -गाजीपुर उत्तर प्रदेश में किया, जो कि आज आराधना मिश्रा के नाम से जानी पहचानी जाती हैं।

रूचि:-

मेरी रूचि समाज सेवा,राजनिती,गरीबों की सहायता, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना, निष्पक्ष न्याय, इमानदारी, सत्य के लिए आवाज उठाना, किताबें पढ़ना, संगीत सुनना, भारतीय ज्योतिष में हैं।

पेशा:-

मेरा मुख्य पेशा वकालत हैं।

राजनैतिक जीवन:-

मेरे राजनैतिक जीवन का प्रारम्भ छात्र जीवन से ही शुरू हुआ,

मैं वर्ष- 1991 में बप्पा श्री नारायण डिग्री कालेज लखनऊ के छात्र संघ उपाध्यक्ष रहा और मैंने छात्रों का कुशल नेतृत्व किया और आज भी मैं छात्रों के बीच लोकप्रिय हूँ।

मै वर्ष- 2001 में यह लखनऊ बार एशोसियसन लखनऊ अधिवक्ताओं की संस्था के कार्यकारिणी सदस्य रहा।

मैं पुनः वर्ष- 2004 में लखनऊ बार एशोसियसन लखनऊ के वरिष्ठ सयुक्त मंत्री रहा और अधिवक्ता समाज का मैंने बेदाग छबि का रहते हुए कुशल नेतृत्व किया जिसकी वजह से आज भी मैं अधिवक्ता समाज में लोकप्रिय हूँ।

मैंने वर्ष- 2005 में यह स्नातक विधान परिषद सदस्य का चुनाव लड़ा जिसमें मै पराजित हुआ।

मैं भारत की जाति, धर्म की राजनैतिक व्यवस्था से आहत था। मै यह भलीभांति जानता था कि भारत फूट डालो-शासन करो कि नीति पर चल रहा हैं।

जिससे आम जनता में आपसी वैमनस्यता बढ रही हैं और आपसी एकता समाप्त हो रही हैं जो कि देश और देशवासियों दोनों के लिए घातक हैं ! हाॅ इससे,जाति धर्म की राजनीति कर सत्ता पाने वाले राजनैतिक दलों का हित जरूर हो रहा हैं ! किन्तु सत्ता में आ जाने के बाद आम जनता का हित बिल्कुल न के बराबर हैं ! केवल जनता के हाथ लगता हैं तो भारतीय नेताओं के आश्वासन।

मेरे नेतृत्व में  “समाज सेवक पार्टी” का वर्ष 2016 में गठन हुआ ताकि “समाज सेवक पार्टी” के मंच से देश की सम्पूर्ण जनता को समान अधिकार समान न्याय तथा समानता का अधिकार दिलाया जा सकें।

मैंने वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में जनपद-लखनऊ की कैन्ट विधानसभा क्षेत्र से”समाज सेवक पार्टी”से  विधान सभा सदस्य का चुनाव लड़ा जिसमें मैं पराजित हुआ।

मेरे नेतृत्व में  “समाज सेवक पार्टी” की बैठक में नितीगत फैसला लिया गया कि पार्टी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लेगी न ही किसी राजनैतिक दल का समर्थन देगी।

मै और  “समाज सेवक पार्टी” आगे आने वाले विधानसभा तथा लोकसभा के चुनावों में पूरे उत्तर प्रदेश के साथ अन्य राज्यों से भी विधान सभा तथा लोकसभा का चुनाव लडेगी उसी तैयारी में मै और  “समाज सेवक पार्टी” लगीं हैं।

अब देखना यह हैं कि मैं और पार्टी देश में व्याप्त जातिगत व धर्मगत राजनीति को समाप्त कर देश में आपसी एकता को स्थापित कर पाते हैं कि नहीं ! यह आम जनमानस के ऊपर निर्भर हैं।

मैं और  “समाज सेवक पार्टी” आम जनमानस से आर्थिक सहयोग लेंगी और आम जनता का ही कार्य करेगी अपराधियों,भ्रष्टाचारियों से न पार्टी कोई आर्थिक सहयोग लेंगी न ही उनके साथ कोई हमदर्दी रखेगी। जिससे देश को अपराध और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा सकें। मेरा और  “समाज सेवक पार्टी” पूरा प्रयास रहेगा कि देश की आम जनता के बीच आपसी भाईचारा बना रहें।

मैं और  “समाज सेवक पार्टी” देश की समस्त जनमानस के बीच समानता का अधिकार और सभी के लिए समान कानून और समान न्याय की व्यवस्था को लागू करने और आम जनमास के आर्थिक विकास संकल्पबद्ध हैं।

यदि आम जनमास ने मुझे और  “समाज सेवक पार्टी” को अपना नेतृत्व करना का अवसर एक बार दिया तो मेरी भूमिका के आम जनमास के सेवक की होगी और सरकार आम जनमास ही चलायेगी ! हाँ यदि आम जनमास ने मुझे आदेश दिया तो मैं और  “समाज सेवक पार्टी” देश को अपराध, भ्रष्टाचार और आतंकवाद मुक्त कर देगी।

जीवन के घटनाक्रम:-

वर्ष- 2010 में राजनैतिक रंजिश के चलते मेरी हत्या करा देने की नियत से मेरे ऊपर पहला जानलेवा हमला लखनऊ में अज्ञात लोगों द्वारा कराया गया।

वर्ष- 2016 में पुनः मेरी दो बार दुर्घटना कराकर हत्या कराने का प्रयास अज्ञात लोगों द्वारा कराया गया तीनों बार के हुए जानलेवा हमलों में मैं बाल-बाल बच गया।

वर्ष- 2016 में लखनऊ कचहरी के एक आपराधिक मामले में मेरे खिलाफ डकैती और हत्या के प्रयास का एक मुकदमा दर्ज हुआ जिसमें पुलिस ने जांच में मुझे निर्दोष पाया।

सामाजिक लोकप्रियता:-

मेरी लोकप्रियता मेरे कुशल व्यवहार से छात्रों, अधिवक्ताऔ और समान्य जनमानस के बीच बराबर बनीं हुयीं हैं।